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भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखना जरूरी: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और भारत-चीन सीमा प्रश्न पर भारत के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में निरंतर विकास और प्रगति के लिए सीमा पर शांति बेहद जरूरी है।

चीन के विदेश मंत्री और सीपीसी केंद्रीय समिति के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य वांग यी के निमंत्रण पर अजीत डोभाल ने 24 और 25 अगस्त 2026 को बीजिंग का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता की सह-अध्यक्षता की।

वार्ता में दोनों पक्षों ने अक्टूबर 2024 में कज़ान और अगस्त 2025 में तियानजिन में दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने लोगों के बीच संपर्क और सीमा-पार आदान-प्रदान के धीरे-धीरे फिर से शुरू होने पर संतोष जताया।

इसमें कैलाश मानसरोवर यात्रा और तीन निर्धारित सीमा व्यापार मार्गों के माध्यम से सीमा व्यापार की बहाली भी शामिल है। दोनों देशों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रणनीतिक मार्गदर्शन में रचनात्मक और भविष्योन्मुखी भावना के साथ सीमा प्रश्न पर स्पष्ट एवं गहन विचार-विमर्श किया।

विशेष प्रतिनिधियों ने भारत और चीन के व्यापक एवं दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा प्रश्न का राजनीतिक समाधान तलाशने के लिए बातचीत और प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों की निरंतर प्रगति के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने आपसी हित से जुड़े द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।

बीजिंग यात्रा के दौरान एनएसए अजीत डोभाल ने चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से भी मुलाकात की।