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उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों को स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है सही एक्सरसाइज, जानिए कौन-सी कसरत है बेहतर

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं और जोड़ों में दर्द या अकड़न उनमें से एक हो सकती है। समय के साथ जोड़ों में मौजूद कार्टिलेज और तरल पदार्थ की मात्रा कम हो सकती है, जिससे जोड़ कमजोर महसूस हो सकते हैं। हालांकि, सही तरीके और नियमितता के साथ किया गया व्यायाम जोड़ों को लंबे समय तक मजबूत और गतिशील बनाए रखने में मदद कर सकता है।

जोड़ों के लिए कार्टिलेज और सिनोवियल फ्लूड क्यों जरूरी हैं?

जोड़ों में हड्डियों के सिरों को आर्टिकुलर कार्टिलेज ढकता है। यह एक विशेष प्रकार का ऊतक है, जो हड्डियों को आपस में घर्षण से बचाने और उन्हें आसानी से गति करने में मदद करता है। वहीं, सिनोवियल फ्लूड घुटनों, कूल्हों और कंधों जैसे जोड़ों में चिकनाई बनाए रखने का काम करता है। यह कार्टिलेज और जोड़ों के बीच घर्षण कम करने के साथ-साथ कार्टिलेज तक जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने में भी मदद करता है।

कार्टिलेज की खुद को ठीक करने की क्षमता सीमित होती है, क्योंकि इसमें अपनी रक्त आपूर्ति नहीं होती। समय के साथ कार्टिलेज के टूटने की प्रक्रिया ऑस्टियोआर्थराइटिस का कारण बन सकती है। यह समस्या खासतौर पर घुटनों, कूल्हों और रीढ़ जैसे वजन उठाने वाले जोड़ों को प्रभावित कर सकती है।

व्यायाम से जोड़ों को कैसे फायदा होता है?

शरीर में गति होने पर सिनोवियल फ्लूड जोड़ों में बेहतर तरीके से वितरित होता है। इसलिए नियमित व्यायाम कार्टिलेज तक इस तरल पदार्थ और उसमें मौजूद पोषक तत्वों की पहुंच में मदद कर सकता है। इसके अलावा, जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां प्राकृतिक शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करती हैं। मांसपेशियों को मजबूत करने से जोड़ों पर पड़ने वाला दबाव कम किया जा सकता है।

शोध के अनुसार, जांघ के सामने मौजूद क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम घुटनों के दर्द को कम करने में विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं। घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस से पीड़ित लोगों पर किए गए एक बड़े समीक्षा अध्ययन में पाया गया कि व्यायाम दर्द कम करने और शारीरिक गतिविधियों को बेहतर बनाने में मदद करता है।

संतुलन और शरीर की स्थिति का एहसास भी जरूरी

उम्र बढ़ने के साथ प्रोप्रियोसेप्शन यानी शरीर के अपने अंगों की स्थिति और गति को महसूस करने की क्षमता कम हो सकती है। इससे वजन जोड़ों पर असमान रूप से पड़ सकता है और समय के साथ उन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

घास, बजरी या अन्य असमान लेकिन सुरक्षित सतहों पर चलने जैसी गतिविधियां टखने, घुटने और कूल्हे के जोड़ों को अपनी स्थिति के अनुसार लगातार समायोजित करने के लिए प्रेरित करती हैं। इससे संतुलन और शरीर के नियंत्रण को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

लो-इंपैक्ट एक्सरसाइज हो सकती हैं बेहतर विकल्प

लो-इंपैक्ट एक्सरसाइज ऐसी गतिविधियां हैं जिनमें जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ता है। तैराकी और वॉटर एरोबिक्स इसके अच्छे उदाहरण हैं। पानी शरीर के वजन का बड़ा हिस्सा सहारा दे सकता है, जिससे जोड़ों पर पड़ने वाला भार कम होता है। साइकिलिंग भी विशेष रूप से घुटनों के लिए उपयोगी हो सकती है।

ताई-ची हल्की गतिविधियों और सांस लेने की तकनीकों पर आधारित व्यायाम है। शोध के अनुसार, घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस से जूझ रहे लोगों में यह फिजिकल थेरेपी के समान लाभ दे सकती है। योग भी जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने और शरीर के लचीलेपन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

चलना भी एक सरल और उपयोगी विकल्प है। सुरक्षित असमान सतहों जैसे घास, बजरी या प्राकृतिक पगडंडियों पर चलने से संतुलन और शरीर की स्थिति को महसूस करने की क्षमता को चुनौती मिल सकती है। संतुलन से जुड़े व्यायाम गिरने के जोखिम को कम करने में भी मदद कर सकते हैं।

शुरुआत कैसे करें?

अगर आपने पहले कभी लो-इंपैक्ट एक्सरसाइज नहीं की है, तो धीरे-धीरे शुरुआत करना बेहतर है। शुरुआत में कुछ मिनट सुरक्षित सतह पर पैदल चलना या एक पैर पर खड़े होकर संतुलन बनाने का अभ्यास किया जा सकता है। एक पैर पर लगभग 30 सेकंड खड़े रहने से शुरुआत करने के बाद धीरे-धीरे कठिनाई बढ़ाई जा सकती है।

व्यायाम करते समय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। संतुलन वाले अभ्यास ऐसी जगह करें जहां जरूरत पड़ने पर किसी मजबूत वस्तु का सहारा लिया जा सके। थकान की स्थिति में अस्थिर सतहों पर व्यायाम करने से बचना चाहिए।

साथ ही, हर व्यायाम हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होता। गलत तरीके से गहरे स्क्वैट या लंज करने अथवा शरीर की क्षमता से अधिक योग मुद्रा करने पर जोड़ों और मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है। इसलिए नया व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने से पहले योग्य फिजियोथेरेपिस्ट या एक्सरसाइज विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में होने वाले बदलाव पूरी तरह रोके नहीं जा सकते, लेकिन सही और नियमित व्यायाम जोड़ों की गतिशीलता, मांसपेशियों की मजबूती और संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है। तैराकी, साइकिलिंग, योग, ताई-ची और सुरक्षित तरीके से पैदल चलना जैसे लो-इंपैक्ट व्यायाम जोड़ों पर कम दबाव डालते हुए सक्रिय रहने के विकल्प प्रदान करते हैं।

Source: The Conversation — मूल लेख “What exercises will keep my ageing joints 
healthy?” के आधार पर। मूल लेख Gordon Waddington, AIS Professor of Sports 
Medicine Research, University of Canberra द्वारा लिखा गया है और सामग्री T
he Conversation द्वारा उपलब्ध कराई गई है।