देश भर में मौसमी इन्फ्लुएंजा के बढ़ते मामलों के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, ICMR, DHR और NCDC स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) के सचिव और ICMR के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में प्रसारित हो रहे वायरस हाल के वर्षों के सामान्य मौसमी पैटर्न के अनुरूप हैं। देश में किसी भी नए या असामान्य स्ट्रेन के उभरने के संकेत नहीं मिले हैं, इसलिए घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जीनोमिक निगरानी और आनुवंशिक बदलाव
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प्रसारित स्ट्रेन की पहचान: ICMR की 73 प्रयोगशालाओं (VRDL) के नेटवर्क की जीनोमिक निगरानी के अनुसार, भारत में इन्फ्लुएंजा A/Missouri/11/2025 (H1N1)pdm09-जैसा वायरस प्रसारित हो रहा है। इसे क्लेड 6B.1A.5a2a और सब-क्लेड D.3.1.1 में वर्गीकृत किया गया है, जो 2025 से देश में सक्रिय है।
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सामान्य ‘एंटीजेनिक ड्रिफ्ट’: डॉ. बहल के अनुसार, वायरस में दिख रहे आनुवंशिक परिवर्तन मौसमी इन्फ्लुएंजा में होने वाले सामान्य ‘एंटीजेनिक ड्रिफ्ट’ (Antigenic Drift) की प्रक्रिया हैं। यह किसी नए या खतरनाक खतरे की ओर इशारा नहीं करता है।
बीमारी की गंभीरता और लक्षण
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हल्का और स्व-सीमित संक्रमण: अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों में H1N1 का संक्रमण हल्का होता है, जो आराम और घरेलू देखभाल से ठीक हो जाता है।
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प्रमुख लक्षण: बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, थकान, कमजोरी और शरीर में दर्द इसके मुख्य लक्षण हैं। केवल H1N1 पॉजिटिव होने का अर्थ गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होना नहीं है।
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उच्च जोखिम वाले समूह: बुजुर्गों, छोटे बच्चों, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले व्यक्तियों और पहले से किसी बीमारी (Co-morbidities) से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेने की आवश्यकता है।
बचाव के उपाय और सरकारी निर्देश
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निवारक आदतें: खांसते व छींकते समय मुंह ढकें, नियमित रूप से हाथ धोएं, पर्याप्त तरल पदार्थ लें और अस्वस्थ महसूस होने पर घर पर रहें।
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स्वयं दवा न लें: बिना चिकित्सकीय परामर्श के एंटीवायरल या एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न करने की सख्त सलाह दी गई है।
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सक्रिय निगरानी तंत्र: स्वास्थ्य मंत्रालय, ICMR और NCDC श्वसन संबंधी बीमारियों की निगरानी के लिए लगातार सक्रिय हैं और समय-समय पर स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

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