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चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत का टैंकर निर्यात छह गुना बढ़कर 1.36 अरब डॉलर पहुंचा, UAE बना सबसे बड़ा खरीदार

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली (अप्रैल-जून) तिमाही में भारत का टैंकर निर्यात छह गुना से अधिक बढ़कर 1.36 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो बीते वित्त वर्ष की समान अवधि में 22.11 करोड़ डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि वैश्विक समुद्री व्यापार में भारत की मजबूत होती स्थिति और जहाज निर्माण (Shipbuilding) क्षमता को दर्शाती है। इस अवधि के दौरान निर्यात किए गए टैंकरों की संख्या भी 10 से बढ़कर 23 हो गई है।

UAE और सिंगापुर सबसे बड़े निर्यात गंतव्य

भारतीय टैंकरों के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है।

  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): भारत से UAE को होने वाला टैंकर निर्यात 10.36 करोड़ डॉलर से बढ़कर 90.08 करोड़ डॉलर हो गया। इस दौरान निर्यात किए गए पोतों की संख्या 4 से बढ़कर 7 हो गई।

  • सिंगापुर: प्रमुख वैश्विक समुद्री केंद्र सिंगापुर 14.64 करोड़ डॉलर (146.4 मिलियन डॉलर) के आयात के साथ दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य रहा, जो पिछले साल समान अवधि में 4.55 करोड़ डॉलर था।

पश्चिम एशिया और नए बाजारों में विस्तार

पश्चिम एशिया क्षेत्र भारतीय टैंकरों के लिए प्रमुख विकास केंद्र बना हुआ है। ओमान को निर्यात बढ़कर 13.16 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि सऊदी अरब भी एक महत्वपूर्ण बाजार बना हुआ है।

इसके अलावा, पड़ोसी देश श्रीलंका को निर्यात 79 लाख डॉलर से बढ़कर 5.65 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। भारत ने कई नए बाजारों में भी अपनी पहुंच बनाई है, जिनमें मिस्र (3.93 करोड़ डॉलर), दक्षिण अफ्रीका (3.42 करोड़ डॉलर), वियतनाम (3.15 करोड़ डॉलर), इंडोनेशिया (1.22 करोड़ डॉलर) और मोजाम्बिक शामिल हैं।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में टैंकरों की भूमिका

टैंकर बड़े आकार के परिवहन पोत होते हैं, जिनका उपयोग कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) और पेयजल जैसे तरल और गैस पदार्थों की भारी मात्रा में सुरक्षित ढुलाई के लिए किया जाता है। एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बाजारों में भारत-निर्मित टैंकरों की बढ़ती मांग भारतीय शिपयार्डों की उच्च गुणवत्ता और वाणिज्यिक नौवहन में देश की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।