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वाणिज्य मंत्रालय ने RoDTEP योजना को 5 साल बढ़ाने की मांग की, व्यय विभाग से चर्चा जारी

भारत के निर्यात क्षेत्र को मजबूती देने और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के उद्देश्य से वाणिज्य मंत्रालय ने ‘निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की वापसी’ (RoDTEP) योजना को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की सिफारिश की है। आगामी 30 सितंबर को समाप्त हो रही इस योजना की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के साथ मिलकर समीक्षा कर रहा है, जिससे निर्यातकों को करों में छूट का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे।

  • 5 साल के विस्तार का प्रस्ताव: वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों को लंबे समय तक स्थिरता और राहत देने के लिए RoDTEP योजना की अवधि को अगले 5 सालों के लिए बढ़ाने की मांग की है।

  • वित्त मंत्रालय से चर्चा: योजना के समय पर नवीनीकरण और बजट आवंटन को लेकर वाणिज्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय का व्यय विभाग (Department of Expenditure) आपस में अंतिम दौर की चर्चा कर रहे हैं।

  • क्या है RoDTEP योजना? जनवरी 2021 में शुरू की गई इस योजना (Remission of Duties and Taxes on Exported Products) का मकसद निर्यातित सामानों पर लगने वाले ऐसे केंद्रीय, राज्य व स्थानीय शुल्कों की वापसी करना है, जो किसी अन्य तंत्र के तहत कवर नहीं होते।

  • रिफंड दर और बजट: इस योजना के तहत निर्यातकों को उत्पाद के अनुसार 0.3% से 3.9% तक का रिफंड दिया जाता है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसका बजट 10,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में यह 18,232 करोड़ रुपये था।

  • व्यापारिक विश्वसनीयता पर जोर: सरकार का प्राथमिक उद्देश्य नीति में निरंतरता बनाए रखना है ताकि भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने ऑर्डर और लागत तय करने में सहूलियत मिले।