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भारत में इस्पात क्षेत्र में मजबूत बढ़त: अप्रैल-जुलाई 2026 के आंकड़े और निर्यात-आयात के रुझान

वित्त वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में भारतीय इस्पात उद्योग ने शानदार मजबूती और वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान देश में तैयार इस्पात के उत्पादन और घरेलू मांग दोनों में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद घरेलू बाजार में मजबूत मांग के चलते इस्पात क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। आइए जानते हैं इस अवधि के दौरान उत्पादन, खपत, आयात-निर्यात और नीतिगत पहलों से जुड़े सभी महत्वपूर्ण आंकड़े।

मुख्य बिंदु (Key Highlights)

  • उत्पादन और खपत: अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान देश का तैयार इस्पात उत्पादन 4.7% बढ़कर 5.47 करोड़ टन हो गया, जबकि घरेलू खपत 7.9% की तेज बढ़त के साथ 5.6 करोड़ टन पहुंच गई।

  • जुलाई माह के आंकड़े: जुलाई में तैयार इस्पात का उत्पादन 3.9% बढ़कर 1.4 करोड़ टन और खपत 6.8% बढ़कर 1.44 करोड़ टन दर्ज की गई।

  • विदेशी व्यापार (आयात-निर्यात):

    • तैयार इस्पात का आयात 36.6% बढ़कर 27.7 लाख टन (मूल्य के लिहाज से 28,330.8 करोड़ रुपये) रहा।

    • तैयार इस्पात का निर्यात 35% बढ़कर 22.9 लाख टन (मूल्य के लिहाज से 18,105.4 करोड़ रुपये) रहा।

    • मात्रा के आधार पर भारत इस अवधि में तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक (Net Importer) बना रहा।

  • आयात और निर्यात के प्रमुख साझेदार:

    • आयात स्रोत: चीन (30.9%), दक्षिण कोरिया (30.2%) और जापान (14.9%)।

    • निर्यात बाजार: वियतनाम (15.4%) और संयुक्त अरब अमीरात – यूएई (14.8%)।

  • अलॉय और स्टेनलेस स्टील:

    • अलॉय स्टील: उत्पादन 26.7% बढ़कर 37.1 लाख टन, खपत 22.1% बढ़कर 40.2 लाख टन और निर्यात 150.7% की छलांग के साथ 1,22,200 टन पहुंच गया।

    • स्टेनलेस स्टील: उत्पादन 4.2% घटकर 13.8 लाख टन रहा, जबकि इसकी खपत 25% बढ़कर 17.7 लाख टन हो गई।

  • नीतिगत पहल और स्थिरता (Sustainability): इस्पात मंत्रालय के अनुसार, खान और खनिज संशोधन अधिनियम, 2026 से कच्चे माल की सुरक्षा मजबूत होगी। इसके साथ ही 15 राज्यों के 98 इस्पात उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र मिल चुके हैं।