लोकसभा ने सोमवार को विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित कर दिया। सदन में लगातार नारेबाजी और विरोध के बीच विधेयक को बिना चर्चा के पारित किया गया। हंगामा जारी रहने के कारण पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले दोपहर 2 बजे दूसरी बार स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। विपक्षी सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के बीच कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पेश किया।
विधेयक का उद्देश्य विभिन्न न्यायाधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति एवं सेवा शर्तों में दक्षता, स्वतंत्रता, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा न्यायाधिकरणों के प्रशासन और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने का भी प्रस्ताव है। विधेयक में नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन की स्थापना का प्रावधान भी किया गया है।
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जा रहे सुधारों की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल्स का उद्देश्य अदालतों का स्थान लेना नहीं है, बल्कि आधुनिक शासन व्यवस्था में न्यायालयों के पूरक संस्थान के रूप में काम करना है।
उन्होंने बताया कि ट्रिब्यूनल्स कराधान, कंपनी कानून, पर्यावरण, प्रतिभूति बाजार, बौद्धिक संपदा और अन्य नियामकीय क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ मामलों की सुनवाई करते हैं। इनका उद्देश्य संबंधित मामलों में त्वरित और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने वर्ष 2015 में ट्रिब्यूनल्स के युक्तिकरण की प्रक्रिया शुरू की थी। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 के माध्यम से आधुनिक, स्वतंत्र और एकरूप ट्रिब्यूनल व्यवस्था तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रस्तावित नेशनल ट्रिब्यूनल्स कमीशन ट्रिब्यूनल्स की नियुक्ति, प्रशासन और संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश द्वारा किए जाने का प्रस्ताव है।
वहीं, सदन में विपक्ष के हंगामे के दौरान पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही चलने देने की बार-बार अपील की। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए कौन जिम्मेदार है।
जगदंबिका पाल ने कहा कि संसद चर्चा और संवाद के लिए है, लेकिन मानसून सत्र के पहले दिन से ही विपक्षी सदस्य लगातार कार्यवाही बाधित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू विपक्ष की उस मांग को पहले ही स्वीकार कर चुके हैं, जिसमें छात्र प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग की गई है।
लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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