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भारत की फार्मा इंडस्ट्री को जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़कर इनोवेशन और क्वालिटी पर देना होगा जोर

भारत की फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री को अपनी पारंपरिक जेनेरिक दवाओं की ताकत को बनाए रखते हुए रिसर्च, इनोवेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और ग्लोबल क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर अधिक निवेश करना होगा। इंडस्ट्री विशेषज्ञों का मानना है कि 2030 तक 130 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल बाजार का लक्ष्य हासिल करने के लिए यह बदलाव बेहद जरूरी है।

हाल ही में हैदराबाद में आयोजित एक इंडस्ट्री कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि फार्मा सेक्टर की अगली ग्रोथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डिजिटल टेक्नोलॉजी, एपीआई मैन्युफैक्चरिंग और कॉन्ट्रैक्ट रिसर्च, डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CRDMO) जैसे क्षेत्रों से आएगी। यह चर्चा सीपीएचआई और पीएमईसी इंडिया 2026 के 19वें संस्करण से पहले आयोजित प्री-इवेंट के दौरान हुई, जिसमें फार्मा और लाइफ साइंसेज सेक्टर के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

तेलंगाना का लाइफ साइंसेज इनोवेशन पर फोकस

तेलंगाना सरकार में लाइफ साइंसेज और फार्मा के सीईओ सर्वेश सिंह ने कहा कि राज्य खुद को बड़े फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग और वैक्सीन हब से आगे बढ़ाकर लाइफ साइंसेज इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाना चाहता है। राज्य का फोकस बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स, सेल और जीन थेरेपी सहित आधुनिक लाइफ साइंसेज क्षेत्रों पर है।

उन्होंने बताया कि नेक्स्ट-जेन लाइफ साइंसेज पॉलिसी 2026-2030 के तहत अगले पांच वर्षों में 25 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने और पांच लाख से अधिक रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।

एपीआई और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत करने की जरूरत

बल्क ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एम. रोजा रानी ने कहा कि भारत ने बल्क ड्रग्स और एपीआई के क्षेत्र में मजबूत क्षमता विकसित की है, लेकिन जरूरी शुरुआती कच्चे माल और इंटरमीडिएट्स के आयात पर निर्भरता कम करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि अगले तीन से पांच वर्षों में रिसर्च, नई तकनीक और एपीआई क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता होगी। पीएलआई योजना और बल्क ड्रग पार्क जैसी सरकारी पहल घरेलू फार्मा मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती दे सकती हैं।

CRDMO सेक्टर में बड़े अवसर

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रस ने कहा कि भारत फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण दशक में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने बताया कि CRDMO इंडस्ट्री के 2028 तक करीब 14 अरब डॉलर और 2030 तक 22 अरब डॉलर तक पहुंचने के अवसर मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि इन अवसरों को वास्तविक ग्रोथ में बदलने के लिए क्वालिटी, टेक्नोलॉजी, उत्पादन क्षमता और ग्लोबल सहयोग पर लगातार ध्यान देना होगा।

जेनेरिक्स के साथ बायोलॉजिक्स और इनोवेशन जरूरी

गुरु मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स की डायरेक्टर पुष्पा विजयराघवन ने कहा कि भारत को जेनेरिक दवाओं के अपने मजबूत आधार को बनाए रखते हुए एपीआई बैकवर्ड इंटीग्रेशन, बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और इनोवेशन में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

वहीं, फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स के चेयरमैन चक्रवर्ती एवीपीएस ने कहा कि फार्मा कंपनियों के लिए रेगुलेटरी कंप्लायंस अब बुनियादी आवश्यकता बन चुका है। प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए एडवांस्ड और सस्टेनेबल पैकेजिंग, ट्रेसेबिलिटी, नई तकनीक और वैश्विक स्तर की क्वालिटी पर जोर देना होगा।

नवंबर में होंगे CPHI और PMEC India 2026

सीपीएचआई इंडिया 2026 का आयोजन 23 से 25 नवंबर तक आईआईसीसी, यशोभूमि, द्वारका में होगा। वहीं, पीएमईसी इंडिया 24 से 26 नवंबर तक इंडिया एक्सपो मार्ट एंड सेंटर, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जाएगा।