प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भारत-बेल्जियम द्विपक्षीय संबंधों का एक अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान और प्रशिक्षण पहलों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की है। नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद पीएम मोदी ने बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने जोर दिया कि साझा लोकतांत्रिक सिद्धांत, मजबूत बाजार अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच मजबूत संबंध दोनों देशों को “स्वाभाविक साझेदार” बनाते हैं।
रक्षा सहयोग पर प्रमुख घोषणाएं
बातचीत के रणनीतिक नतीजों के बारे में विस्तार से बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, “रक्षा और सुरक्षा सहयोग हमारे संबंधों का एक मुख्य स्तंभ है। आज, हमने दोनों देशों के बीच सैन्य आदान-प्रदान और प्रशिक्षण सहयोग को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की है। हमारी सरकारों और रक्षा उद्योगों के बीच हुए समझौते रक्षा क्षेत्र में मिलकर विकास और उत्पादन के नए अवसर खोलेंगे। हम अपनी-अपनी एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और अपराध के खिलाफ सहयोग को भी और मजबूत करेंगे।”
ऐतिहासिक संबंध और रणनीतिक विस्तार
पिछले दस वर्षों में राजनयिक संबंधों में आए उल्लेखनीय बदलावों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर रक्षा नवाचार और टिकाऊ ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों तक फैल गया है। उन्होंने जोरावर लाइट टैंक जैसे उन्नत सैन्य हार्डवेयर से जुड़े सहयोगी प्रोजेक्ट्स और आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक प्रमुख ग्रीन अमोनिया सुविधा के विकास जैसी बड़ी आर्थिक पहलों का उल्लेख किया।
ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “भारत और बेल्जियम के संबंध इतिहास में गहराई से जुड़े हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में हजारों भारतीय सैनिकों का साहस और बलिदान हमारी साझा यादों का एक अहम हिस्सा है। आज, लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच मजबूत संबंध में हमें स्वाभाविक साझेदार बनाते हैं।”
आर्थिक वृद्धि और व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य
वैश्विक अस्थिरता के बीच पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया भर में व्यवधानों के बावजूद भारत लगातार स्थिर आर्थिक विकास दर्ज कर रहा है। उन्होंने कहा, “आज दुनिया बड़े उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष जारी हैं, जबकि अनिश्चितता भोजन, ईंधन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है। इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी, भारत की अर्थव्यवस्था ने अपनी गति बनाए रखी है। भारत ने पिछली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। आज, भारत की विकास गाथा दुनिया के लिए आत्मविश्वास और नए अवसरों का स्रोत बन रही है।”
प्रधानमंत्री ने जनवरी में हुए ऐतिहासिक भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के सकारात्मक असर पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि व्यापार के इन नए मौकों का पूरा फायदा उठाने के लिए दोनों देशों के बीच व्यापार को तेजी से बढ़ाने के मकसद से खास संस्थागत उपाय किए गए हैं।
उन्होंने बताया, “आज हमने इन संभावनाओं को ठोस नतीजों में बदलने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हमने बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारत में ‘इन्वेस्टमेंट फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म’ बनाया है। हमने भारत-बेल्जियम बिजनेस फोरम को एक नियमित व्यवस्था बनाने का फैसला किया है। हम दोनों देशों के वित्तीय, फिनटेक और रेगुलेटरी संस्थानों के बीच तालमेल बढ़ाएंगे और इन उपायों के जरिए अगले पांच सालों में आपसी व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल करेंगे।”
स्वच्छ ऊर्जा और सेमीकंडक्टर सहयोग
रिन्यूएबल एनर्जी से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से स्थिरता की संयुक्त पहलों को गति मिलने और मजबूत सप्लाई चेन सुनिश्चित होने की उम्मीद है। तकनीकी सहयोग पर पीएम मोदी ने कहा, “साफ ऊर्जा वाला भविष्य और भरोसेमंद सप्लाई चेन हमारी साझा प्राथमिकताएं हैं। आज रिन्यूएबल एनर्जी पर हुए समझौते से सस्टेनेबिलिटी पर हमारे सहयोग को नई गति मिलेगी। हमने जरूरी खनिजों की प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में बेल्जियम की विशेषज्ञता और भारत का बड़े पैमाने पर काम करने का सामर्थ्य एक-दूसरे के पूरक हैं। इस दिशा में, हम बेल्जियम के आईएमईसी इंस्टीट्यूट को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए मिलकर काम करेंगे।”

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